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हमारे विषय में
आकाशवणी के
समाचार सेवा प्रभाग के कार्यकलाप
आकाशवाणी, जो अब प्रसार भारती के तहत है, की यह विशिष्टता है कि वह विश्व की सबसे
बड़ी प्रसारक संस्था है। आकाशवाणी का समाचार सेवा प्रभाग (स.से.प्र.) भारत एवं विदेश
में श्रोताओं के लिए समाचारों और समीक्षाओं का प्रचार करता है। १९३९-४० में २७
बुलेटिनों से शुरूआत के साथ आज आकाशवाणी स्वदेशी, क्षेत्रीय एवं विदेश सेवा के लिए
९० भाषाओं/बोलियों में प्रतिदिन लगभग ५५ घंटे के ४७ से अधिक बुलेटिन प्रसारित करता
है।
इनमें से दिल्ली से प्रतिदिन ३३ भाषाओं में १७३ बुलेटिन प्रसारित होते हैं। ४४
क्षेत्रीय समाचार इकाइयां ७५ भाषाओं में प्रतिदिन ४७४ बुलेटिन प्रसारित करती हैंं।
इनमें एफ.एम. गोल्ड और आकाशवाणी के ४० केन्द्रों से प्रसारित ३१४ मुख्य समाचार
बुलेटिन शामिल हैं।
दैनिक समाचार बुलेटिनों के अलावा समाचार सेवा प्रभाग प्रतिदिन समसामयिक विषयों पर
समाचार आधारित बहुत से कार्यक्रम दिल्ली एवं क्षेत्रीय समाचार इकाइयों से प्रसारित
करता है।
प्रारंभिक इतिहास
भारत में समाचार प्रसारण का इतिहास आकाशवाणी के इतिहास से काफी पुराना है। देश का
पहला समाचार बुलेटिन २३ जुलाई १९२७ को एक निजी कम्पनी इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कम्पनी
द्वारा प्रसारित किया गया था। एक माह पश्चात् २६ अगस्त १९२७ को कलकत्ता केन्द्र से
बंगाली बुलेटिन की शुरूआत हुई। सन् १९३७ तक बम्बई से दो बुलेटिन एक अंग्रेजी एवं
एक हिन्दुस्तानी में तथा कलकत्ता से एक बुलेटिन बंगाली में प्रसारित किया जाता था।
मार्च १९३० में इंडिया ब्राडकास्टिंग कम्पनी बंद हो गई और प्रसारण सीधे भारत सरकार
के नियंत्रण में आ गया। इस सेवा का नाम ÷इंडियन स्टेट ब्राडकास्टिंग सर्विस' रखा गया।
८ जून, १९३६ को इसका नाम आल इण्डिया रेडियो कर दिया गया।
विकास
समाचार प्रसारण में वास्तविक मोड़ जनवरी १९३६ के बाद आया जब १९ जनवरी १९३६ को दिल्ली
केन्द्र द्वारा ट्रांसमीशन की शुरूआत के साथ-साथ पहला समाचार बुलेटिन प्रसारित हुआ।
अंग्रेजी एवं हिन्दुस्तानी में समाचार बुलेटिन के इलावा दोनों भाषाओं में समसामयिक
मुद्दों पर वार्ता भी आरम्भ की गई।
१ अगस्त, १९३७ को सेन्ट्रल न्यूज+ आर्गनाइजे+शन की स्थापना हुई। श्री चार्ल्स
बर्न्स ने सितम्बर में पहले समाचार संपादक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया और बाद
में वे प्रथम समाचार निदेशक बने। १९३९ में द्वितीय विश्व युद्ध ने इस संगठन के
विकास को बढ़ावा दिया। १९३९ में विदेश प्रसारणों की मानिटरिंग के लिए मानिटरिंग
सर्विस स्थापित की गई। १९४३ में निदेशक समाचार के अधीन विदेश प्रसारण इकाई स्थापित
की गई। सन् १९४५ तक सेंट्रल न्यूज आर्गनाइजेशन ने विभिन्न भारतीय भाषाओं के समाचार
बुलेटिनों के साथ-साथ विदेश सेवा का प्रसारण भी किया।
स्वतंत्रता के बाद, आकाशवाणी के समाचार प्रसारण में संख्यात्मक एवं गुणात्मक वृद्धि
हुई है। राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचारों को अधिक महत्व दिया जाने लगा।
स्वदेशी बुलेटिन
समाचार सेवा प्रभाग दिल्ली से प्रतिदिन अंग्रेज+ी, हिन्दी और ३३ भारतीय भाषाओं में
१२ घंटे एवं २० मिनट अवधि के १७३ बुलेटिन प्रसारित करता है। इसमें विदेश सेवा के २२
भाषाओं में ५६ बुलेटिन शामिल हैं। हिन्दी में २ घंटे ३५ मिनट अवधि के २२ समाचार
बुलेटिन और अंग्रेज+ी में प्रतिदिन २ घंटे ३५ मिनट अवधि के २० समाचार बुलेटिन
प्रसारित किए जाते हैं। इनमें हिंदी और अंग्रेज+ी के दो खेल समाचार बुलेटिन शामिल
हैं। हिन्दी के अलावा प्रतिदिन १८ भारतीय भाषाओं में ७ घंटे ४५ मिनट अवधि के समाचार
बुलेटिन ४० बार प्रसारित किए जाते हैं। भाषाई बुलेटिनों का महत्व इसलिए है कि ये
छोटे कस्बों और गांवों की जनता के लिए राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय
समाचारों को जानने का मुख्य स्रोत हैं। डोगरी, कश्मीरी एवं उर्दू के सांध्यकालीन
बुलेटिनों में सामयिक विषयों पर कमेंट्री भी शामिल की जाती है।
क्षेत्रीय बुलेटिन
क्षेत्रीय बुलेटिनों की शुरूआत पचास के आरंभ मे की गई थी। अप्रैल १९३५ में लखनऊ और
नागपुर केन्द्र से क्षेत्रीय भाषा में पहला बुलेटिन आरंभ हुआ। १९५४-५५ में बम्बई,
मद्रास एवं कलकत्ता में क्षेत्रीय समाचार इकाइयां स्थापित की गईं। यह कार्य अनवरत
चलता रहा और आज देश भर में ४५ क्षेत्रीय समाचार इकाइयां कार्य कर रही हैं। ७५
क्षेत्रीय भाषाओं/बोलियों सहित अंग्रेजी एवं हिन्दी में ३३ घंटे एवं २५ मिनट अवधि
के ४७४ समाचार बुलेटिन प्रसारित किए जाते हैं। इसमें ३९ केन्द्रों द्वारा एफ.एम. और
अन्य फ्रिक्वेंसियों से प्रसारित किए जाने वाले २९० मुख्य समाचार शामिल हैं।
विदेशी बुलेटिन
शुरू में विदेश सेवा समाचार सेवा प्रभाग का ही एक भाग था। १५ सितम्बर १९४८ को इसे
समाचार सेवा प्रभाग से अलग कर दिया गया था। तथापि, विदेश समाचार बुलेटिनों के संकलन
का दायित्व समाचार सेवा प्रभाग का रहा।
फिलहाल प्रतिदिन २६ भाषाओं (भारतीय एवं विदेशी) में ९ घंटे एवं १३ मिनट की अवधि के
कुल ६६ समाचार बुलेटिन प्रसारित किए जाते हैं। इनमें से ५६ दिल्ली से प्रसारित किए
जाते हैं जबकि १ घंटे २० मिनट अवधि के १० बुलेटिन हमारी ५६ क्षेत्रीय समाचार इकाइयों
-मुंबई(०१), कलकत्ता (०३), हैदराबाद (०१) चैन्नई (२), धारवाड़ (११) अहमदाबाद(२) से
प्रसारित किए जाते हैं।
एफ एम"रेनबो'' चैनल से बुलेटिन
२८ मई १९९५ से समाचार सेवा प्रभाग एफ एम रेनबो चैनल से मुख्य समाचार प्रसारित कर रहा
है। दिल्ली के एफ एम रेनबो चैनल से रात-दिन २४ मुख्य समाचार बुलेटिन प्रसारित किए
जाते हैं। एफ एम रेनबो दिल्ली से मुख्य समाचार प्रसारण की अवधि लगभग एक मिनट है। अभी,
आकाशवाणी के २२ केन्द्रों से एफ एम मुख्य समाचार प्रसारित किए जा रहे हैं।
एफ एम गोल्ड चैनल पर
बुलेटिन
१ सितम्बर २००१ को तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने ए.आई.आर एफ.एम.-२ (अब
एफ.एम. गोल्ड) नामक समाचार एवं मनोरंजन चैनल का उद्घाटन किया। यह चैनल प्रातः ६ बजे
से रात्रि १२ बज कर १० मिनट तक १८ घंटे के कार्यक्रम प्रसारित करता है। यह सूचना एवं
मनोरंजन का सम्मिश्रण है जिसका एक तिहाई समाचारों एवं समसामयिक कार्यक्रमों को दिया
जाता है। दिल्ली में तैयार किए गए समाचार यह चैनल हर घंटे प्रसारित करता है।
प्रतिदिन ३० मिनट की अवधि के समाचारों पर आधारित कार्यक्रम ÷दोपहर समाचार' हिन्दी
में तथा ÷मिड डे न्यूज+' अंगेज+ी में प्रसारित किए जाते हैं। चैनल पर ÷÷मार्केट
मंत्रा'' (बिजनेस मैगज+ीन) और स्पोर्टस स्कैन'' जैसे कुछ विशिष्ट कार्य्रक्रम भी
उपलब्ध हैं। एफ एम गोल्ड के लिए समाचारों पर आधारित बनाए जाने वाले अन्य कार्यक्रम
है ÷÷वाद संवाद'' ÷एवं कंट्रीवाइड' इनमें प्रसिद्ध व्यक्तियों से साक्षात्कार शामिल
रहता है। हाल ही में केवल एफ. एम. चैनल के लिए कुछ और समाचार कार्यक्रम शुरू किए गए
हैं। ये हैं आज सवेरा, परिक्रमा और पब्लिक स्पीक।
समाचार आधारित कार्यक्रम
फरवरी १९३६ में पहली बार अंग्रेजी में समसामयिक विषयों पर वार्ता कार्यक्रम की
शुरूआत की गई। सितम्बर में समसामयिक विषय पर हिन्दुस्तानी में वार्ता कार्यक्रम भी
शामिल किया गया। तत्पश्चात् २६ अक्तूबर १९६२ में समसामयिक मुद्दों पर 'टापिक्स फार
टुडे' और 'फोकस' जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए। वर्ष १९६७ में 'टापिक फार टुडे' को
दैनिक ' स्पाटलाइट' और फोकस को साप्ताहिक 'करंट अफेयर्स' शीर्षक दिए गए।
समसामयिक कार्यक्रम सामयिक मुद्दों पर होते हैं जिसमें विशेषज्ञ अपने विचार प्रकट
करते हैं। दिल्ली से रविवार रात्रि ९ बजकर ३० मिनट पर आधे घंटे का अंग्रेज+ी का
कार्यक्रम प्रसारित किया जाता है। हिन्दी कार्यक्रम 'चर्चा का विषय है' रात्रि ९
बजकर ३० मिनट पर बुधवार को प्रसारित किया जाता है। "सामयिकी" और "स्पॉट लाइट" जैसे
समाचार आधारित कार्यक्रम दिल्ली से प्रतिदिन प्रसारित किये जाते हैं। समसामयिक विषयों
पर मुख्यालय दिल्ली से प्रतिदिन उर्दू, कश्मीरी एवं डोगरी में कमेंट्री प्रसारित की
जाती है।
संसदीय कार्रवाइयों की कवरेज
१४ फरवरी, १९६१ से संसद की कार्रवाइयों की दैनिक एवं साप्ताहिक समीक्षा का अंग्रेज ी
एवं हिन्दी में प्रसारण शुरू किया गया। अंग्रेज+ी में दैनिक समीक्षा 'टुडे इन
पार्लियामेंट'' और हिन्दी में 'संसदीय समीक्षा' दो भाग हैं। एक में लोकसभा एवं दूसरी
में राज्य सभा की कार्रवाई होती है। अंग्रेजी में साप्ताहिक समीक्षा ÷÷दिस वीक इन
पार्लियामेंट'' और हिन्दी में 'इस सप्ताह संसद में' दोनों सदनों की सप्ताहभर के
दौरान की महत्वपूर्ण गतिविधियां शामिल की जाती हैं।
राज्य विधानसभाओं की कार्रवाइयों की दैनिक एवं साप्ताहिक समीक्षा का प्रसारण उनके
सत्र के दौरान उनकी क्षेत्रीय भाषाओं में १९७१-७२ में शुरू हुआ। 'दिल्ली विधानसभा
की कार्रवाई' की समीक्षा का प्रसारण १४ दिसम्बर १९९३ में आरंभ हुआ था।
रेडियो न्यूज+रील
१० दिसम्बर १९५५ में न्यूज+रील दोनों भाषाओं में अंग्रेज+ी (रेडियो न्यूज+रील) और
हिन्दी (समाचार दर्शन) में दिल्ली से शुरू किए गए। अंग्रेज+ी में न्यूज+रील का
प्रसारण सोमवार, मंगलवार, गुरूवार एवं शनिवार को और समाचार दर्शन का बुधवार,
शुक्रवार एवं रविवार को किया जाता है। कुछ क्षेत्रीय समाचार इकाइंया भी अपनी
क्षेत्रीय भाषाओं में क्षेत्रीय न्यूज+रील प्रसारित करती हैं।
न्यूज ऑन फोन सर्विस
फोन पर आकाशवाणी समाचारों की शुरूआत दिल्ली से २५ फरवरी १९९८ को की गई थी। यह सेवा
श्रोताओं को विश्व के किसी भी कोने में निर्धारित नम्बरों को डायल करने पर हिन्दी
और अंग्रेज+ी में ताजा समाचारों की हाइलाइट उपलब्ध कराती है। तत्पश्चात् चेन्नई से
तमिल में, हैदराबाद से तेलुगु में मुंबई से मराठी में और पटना से हिन्दी में न्यूज
ऑन फोन सेवा शुरू की गई। यही सेवा अहमदाबाद, तिरूअनंतपुरम्, बंगलौर और जयपुर से
क्षेत्रीय समाचार इकाइयों द्वारा २००६ में तथा इम्फाल और लखनऊ से २००७ में आरंभ की
गई। अब न्यूज+ ऑन फोन सर्विस आकाशवाणी के दिल्ली सहित १४ केन्द्रों पर उपलब्ध है।
समाचारों के स्र्रोत
आकाशवाणी समाचारों का स्रोत देशभर में फैले इसके संवाददाता हैं। भारत में ९० नियमित
और ांच विदेश में कोलंबो, ढाका, दुबई, काठमांडू एवं काबूल में पांच संवाददाता हैं।
इसके अतिरिक्त आकाशवाणी के सभी जिला मुख्यालयों में लगभग ५०० अंशकालिक संवाददाता
हैं। ये अंशकालिक संवाददाता दूरदर्शन समाचारों की आवश्यकता भी पूरी करते हैं।
समाचार सेवा प्रभाग अपने बुलेटिनों में विस्तार लाने के लिये यू एन आई, पी टी आई
उनकी हिन्दी सेवाओं-यूनीवार्ता एवं भाषा से समाचार खरीदता है। समाचारों का अन्य
स्रोत है उसकी मॉनटरिंग इकाई (अंग्रेज+ी और हिन्दी) जो सामान्य समाचार कक्ष और
सेंट्रल मॉनिटरिंग सर्विस से संबद्ध हैं ये विश्व के मुख्य प्रसारण संगठनों के
बुलेटिनों को मानिटर करते हैं। एशिया पेसिफ़िक ब्रॉडकास्टिंग यूनियन के सदस्यों की
भागीदारी के साथ एक रेडियो समाचार विनिमय कार्यक्रम शुरू किया गया ताकि समाचार
प्रसारण को विस्तार दिया जा सके। समाचार सेवा प्रभाग की सूचना प्रौद्योगिकी की
आवश्यकताओं को पूरा करने की दृष्टि से दिल्ली में सूचना प्रौद्योगिकी इकाई स्थापित
की गई। इस इकाई ने क्षेत्रीय समाचार इकाइयों की समाचार आवश्यकताओं को पूरा करने के
लिए एक (इनटरनल) वेबसाइट बनाई है।
समाचार सेवा प्रभाग का
ढांचा
समाचार सेवा प्रभाग का प्रमुख महानिदेशक(समाचार) (प्र.भा.)होता है। यह भारतीय सूचना
सेवा का वरिष्ठतम अधिकारी होता है। इसकी सहायता के लिए अपर महानिदेशकों(समाचार)
निदेशकों(समाचार) और संयुक्त निदेशकों (समाचार) की एक टीम होती है।
समाचार सेवा प्रभाग के मुख्यालय दिल्ली में कई आपरेशनल विंग हैं जिनमें जनरल न्यूज+
रूम, हिन्दी न्यूज+ रूम, रिपोर्टिंग एकक, वार्ता एकक (अंग्रेज+ी एवं हिन्दी),
न्यूज+रील एकक, न्यूज+ फ़ॉरमेट सेल, भारतीय भाषा एकक, मॉनिटरिंग एकक, संदर्भ एकक एवं
प्रशासन स्कन्ध शामिल हैं।
विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय समाचार इकाइयों का प्रमुख संयुक्त निदेशक अथवा
समाचार संपादक या सहायक समाचार संपादक होता है। जिसकी सहायता के लिए संवाददाता,
रिपोर्टर समाचार वाचक एवं अनुवादक होते हैं।
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