किसी व्यक्ति को आकाशवाणी से प्रसारण की अनुमति नहीं देगाः
१. मित्र देशों की आलोचनाय
२. धर्म व सम्प्रदाय पर आक्रमणय
३. किसी भी प्रकार की अश्लीलता या निन्दाय
४. किसी भी प्रकार की हिंसा को भड़काने अथवा कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के खिलाफ
किसी बात को।
५. अदालत की अवमानना का प्रयासय
६. राष्ट्रपति, राज्यपाल तथा न्यायपालिका की सत्यनिष्ठा की निंदा।
७. किसी राजनैतिक दल का नाम लेकर उसकी निन्दा करनाय
८. किसी राज्य अथवा केन्द्र की विद्वेषपूर्ण निन्दाय
९. संविधान के प्रति अनादर अथवा हिंसा द्वारा संविधान में परिवर्तन की वकालत करना :
परन्तु संवैधानिक तरीके द्वारा परिवर्तन की वकालत को नहीं रोका जा सकता।
१०. बाह्य आकस्मिक संकट अथवा प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, भूकंप, चक्रवात का सामना
देश कर रहा हो तो प्रधानमंत्री, राहतकोष के लिए फंड की अपील।
११. किसी व्यक्ति अथवा संगठन का प्रत्यक्ष प्रचार करना जिससे केवल उस व्यक्ति या
संगठन विशेष को लाभ हो।
१२. ट्रेड नामों का प्रसारण जो सीधे विज्ञापनों जैसा प्रतीत हो (विज्ञापन सेवाओं को
छोड़कर)।
फुटनोट
१. यह संहिता, मैत्रीपूर्ण सरकार अपना राजनैतिक दल अथवा केन्द्रीय सरकार अथवा राज्य
सरकार के व्यक्तिगत प्रवृति की उत्तजेनापूर्ण आलोचना पर लागू होती है। परन्तु यह
इनमें से किसी की भी नीतियों पर किए गए आवेशहीन/शन्तिपूर्ण आलोचना को नहीं रोकती।
२. यदि केन्द्र निदेशक को महसूस होता है कि प्रसारक ने इरादतन किसी के लिए उपरोक्त
संहिता का अनादर किया है तो उस वाक्यांश (पैरा) के लिए वो आपत्ति प्रकट कर सकते
हैं। यदि प्रसारक केन्द्र निदेशक के सुझाव को मानने से इन्कार करता है तो केन्द्र
निदेशक उसके प्रसारण को रूकवा सकते हैं।
३. किसी वार्ता या प्रसारण पर राज्यमंत्री और केन्द्र निदेशक के बीच यदि संहिता की
व्याख्या में विचारों का मतभेद रहता है तो उसे सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत
सरकार को भेजा जाएगा जो यह अंतिम निर्णय लेगा कि वार्ता के विषय को यथावत रखा जाए
अथवा बदला जाए ताकि संहिता के उल्लंघन से बचा जा सके।
दूरदर्शन/रेडियो प्रसारण के लिए आचार संहिता
चुनावों के संबंध में
निर्वाचन आयोग (नि.आ.) को चुनाव कवरेज में दूरदर्शन एवं रेडियो के महत्व की
जानकारी है। इसकी पहुंच व्यापक और प्रभाव महत्वपूर्ण है। एक ओर तो इलेक्ट्रानिक
मीडिया का दुरूपयोग एक दल अथवा अन्य किसी दल के पक्ष में किया जा सकता है। परन्तु
दूसरी ओर निर्वाचन आयोग जानता है कि यदि इलेक्ट्रानिक मीडिया का उपयुक्त प्रयोग किया
जाए तो यह देशभर के मतदाताओं के लिए सूचना का महत्वपूर्ण स्रोत हो सकता है। यह
मतदाताओं को राजनैतिक दलों के चिन्ह, विभिन्न नेताओं और चुनाव के विभिन्न मुद्दों
के विषय में स्पष्ट एवं व्यापक शिक्षा प्रदान कर सकता है। इसी कारण सम्पूर्ण विश्व
में इलेक्ट्रानिक मीडिया वाद-विवादों चुनावी अभियानों की कवरेज और मतदाताओं को सूचना
देने का एक मात्र सबसे बड़ा स्रोत है।
इसलिए यह आवश्यक था कि इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए संहिता बनाई जाए ताकि इसका
दुरूपयोग न हो और लोकतंत्र तथा मतदाता के हित में इसका सदुपयोग हो सके।
चुनाव के दौरान कवरेज
चुनाव कवरेज के दौरान दिशा-निर्देश निम्नलिखित हैं।
(क) क्या न करें।
;१द्धकिसी भी चुनावी भाषण या ऐसी अन्य सामग्री को शामिल न करें जो किसी धर्म के
प्रति, एक विशेष जाति के प्रति, एक भाषा के प्रति घृणा/हिंसा को भड़काता हो।
;२द्ध किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से केवल एक ही उम्मीदवार को प्रोजेक्ट नहीं करना
चाहिए। यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक उम्मीदवार (कुछ चुनाव क्षेत्रों में बहुत से
उम्मीदवार होते हैं)को कवर किया जाए किन्तु उस चुनाव क्षेत्र से अति महत्वपूर्ण
उम्मीदवारों को किसी रिपोर्ट में अवश्य शामिल किया जाना चाहिए।
;३द्ध निम्नलिखित को संतुलित और न्यायपूर्ण तौर पर कवर किया जा सकता है-
१ चुनावी अभियान एक चुनावी अभियानों के भाषणों के अंश।
२ पार्टियों के चुनाव चिन्ह, बैनर्स, फ्लैग व अन्य अभियान सामग्री।
३ गैर राजनैतिक दलों, व्यावसायिक संगठनों के द्वारा जारी ओपिनियन पोल जिनका पिछला
रिकार्ड अच्छा है के परिणाम ही प्रसारित करें।
४ पार्टी का घोषणा पत्र (जिसका आलोचनात्मक विश्लेषण पूर्णतया तर्कसंगत है)
५ देशभर के विभिन्न चुनावी क्षेत्रों के उम्मीदवारों के विचार
६ निर्वाचक मंडल के महत्वपूर्ण मुद्दों पर मुख्य राजनैतिक दलों द्वारा लिए गए
निर्णय।
७ मुख्य दलों व उनके उम्मीदवारों के बीच वाद-विवाद
८ विश्लेषण, पिछला चुनावी पैटर्न, पिछली जीत में अंतर और रूझान आदि।
(४) संतुलित व निष्पक्ष से तात्पर्य है कि प्रमुख राजनैतिक दलों के बीच -:
९ किसी भी राजनैतिक दल को दूसरे दल से अधिक कवरेज न दी जाए। यह संतुलन कायम करना
किसी एक दिन एक स्टोरी तक सीमित न हो उसे उचित निश्चित अवधि यानि एक सप्ताह तक के
अंदर पूरा किया जा सकता है।
१० संतुलन का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक पार्टी को समान प्रसारण समय उपलब्ध कराया
जाए बल्कि उस पार्टी को भी उतना समय अलग अलग वक्त पर दिया जाना चाहिए।
११ संतुलन से अभिप्राय है किसी व्यक्ति को यह नहीं लगना चाहिए कि एक राजनैतिक पार्टी
को दूसरी पार्टी से अधिक प्रोजेक्ट किया जा रहा है।
५. प्रक्रिया
१२ सभी कार्यक्रम निर्माताओं को अपने कार्यक्रमों की रिकार्डिंग रखनी चाहिए ताकि
किसी विवाद की स्थिति में उसे संदर्भ के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
१३ किसी भी विवाद की स्थिति में निर्वाचन आयोग का निर्णय अंतिम होगा।
(६) किसी विवादास्पद वार्ता अथवा स्टोरी पर अंतिम व्याख्या का अधिकार
१४ निर्वाचन आयोग प्रसारक से मतभेद होने की स्थिति में प्रसारक अथवा प्रसारणकर्ता
निर्वाचन आयोग के पास शिकायत कर सकते हैं तब निर्वाचन आयोग मामले में तत्काल निर्णय
लेने के लिए एक अधिकारी नियुक्त करेगा।
अनुवर्ती स्पष्टीकरण
ओपीनियन/गैलप पोल को मतदान के प्रत्येक चरण अथवा मतदान समाप्त होने के ४८ घंटे के
भीतर प्रसारित/प्रकाशित नहीं किया जा सकता।
प्रत्येक चरण के मतदान के पूरा होने से पहले एक्जि+ट पोल के नतीजे प्रसारित/प्रकाशित
नहीं किए जाने चाहिएं।